Wednesday, June 16, 2010

संडे की शामें


कृपया इमेज देखें...

7 comments:

indli said...

नमस्ते,

आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

Rajey Sha said...

वाकई आम आदमी के लि‍ये रवि‍वार ही जीने का दि‍न होता है इस पर बहुत कुछ लि‍खा जा सकता है

ghazalganga said...

लंबे समय से आपने कोई पोस्ट नहीं डाला है...
कुछ तो कहिये कि लोग कहते हैं
आज ग़ालिब गज़लसरा न हुआ.

----देवेंद्र गौतम

daanish said...

सन्डे की शाम का किस्सा
बहुत ही मनभावन सा लगा
कहीं आस-पास कुछ ऐसा लिखा पाया
अछा शगुन ही माना जाना चाहिए ... !!

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

शुभ दीपावली,

raju said...

रितेश खरे, आप के दोनों ब्लॉग देखे. 'री फोलियो' ब्लॉग का विषय समझ में नहीं आया. और यह ब्लॉग शायद आप डायरी की तरह ओपरेट करना चाहते है.शुभकामनाएं--- एक मशवरा है -गौर कीजिएगा : ब्लॉग की रंग योजना रीडर फ्रेंडली बिलकुल नहीं.कुछ कीजिए.

Shyamali Tripathi said...

khoobsurat aur rumaani