Wednesday, June 16, 2010

संडे की शामें


कृपया इमेज देखें...

6 comments:

  1. वाकई आम आदमी के लि‍ये रवि‍वार ही जीने का दि‍न होता है इस पर बहुत कुछ लि‍खा जा सकता है

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  2. लंबे समय से आपने कोई पोस्ट नहीं डाला है...
    कुछ तो कहिये कि लोग कहते हैं
    आज ग़ालिब गज़लसरा न हुआ.

    ----देवेंद्र गौतम

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  3. सन्डे की शाम का किस्सा
    बहुत ही मनभावन सा लगा
    कहीं आस-पास कुछ ऐसा लिखा पाया
    अछा शगुन ही माना जाना चाहिए ... !!

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  4. रितेश खरे, आप के दोनों ब्लॉग देखे. 'री फोलियो' ब्लॉग का विषय समझ में नहीं आया. और यह ब्लॉग शायद आप डायरी की तरह ओपरेट करना चाहते है.शुभकामनाएं--- एक मशवरा है -गौर कीजिएगा : ब्लॉग की रंग योजना रीडर फ्रेंडली बिलकुल नहीं.कुछ कीजिए.

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